पहली मोहब्बत का पहला खत

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Pahli mohabbat Ka Pahla Khat: गांव से करीब तीन किलोमीटर स्कूल था जहाँ बारहवीं तक पढाई होती है, स्कूल का नाम राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय’। वहां ग्यारहवीं क्लास में पढ़ते थे दो बिल्कुल अलग दुनिया के लोग—राजू और अनिका।

राजू एक साधारण-सा लड़का था। गेहुँआ रंग, कंधे तक लंबे बाल जो हमेशा बिखरे रहते, और चेहरे पर एक हल्की-सी शरारती मुस्कान। वो पढ़ने में ठीक-ठाक था, लेकिन उसका असली हुनर था सपने देखना। और उसके सपनों की रानी थी अनिका। अनिका स्कूल की सबसे खूबसूरत लड़की थी। उसकी बड़ी-बड़ी आँखें, जिनमें जैसे कोई गहरा राज छुपा हो, और लंबे काले बाल, जो हवा में लहराते तो हर किसी का ध्यान खींच लेते। अनिका पढ़ने में भी अव्वल थी। गणित के सवाल हों या हिंदी की कविताएँ, वो हर विषय में टीचर की तारीफ बटोरती। जिससे क्लास की बाकि लड़किया उस से जलती भी थी।

प्यार की शुरुआत

इस प्यार की शुरुआत उस दिन हुई थी जब वो प्रार्थना सभा में अनिका को पहली बार मंच पर देखा था। सफेद यूनिफॉर्म में वह इतनी अलग लग रही थी जैसे आसमान में चांद उतर आया हो। उसकी आवाज़ में आत्मविश्वास था, आँखों में चमक, और चेहरे पर वो मासूमियत जो किसी भी लड़के के दिल को बेकाबू कर सकती थी। राजू तो पुरे प्रार्थना में सिर्फ अनिका को ही देखता रहा।

उस दिन के बाद राजू की सुबहें अनिका की झलक से शुरू होतीं और शामें उसी की तस्वीर को आंखों में लिए बीततीं। क्लास में ऐसी सीट जानबूझकर उस जगह चुनता, जहां से अनिका की बेंच साफ दिखे। कई बार तो वो किताब खोले बिना सिर्फ उसकी झलक से पूरा दिन निकाल देता।

क्लास में जब भी अनिका ब्लैकबोर्ड की तरफ देखती या अपनी कॉपी में कुछ लिखती, राजू चुपके से उसे निहारता। उसकी नजरें अनिका के चेहरे पर टिक जातीं, और वो समय को जैसे भूल जाता। लेकिन जैसे ही अनिका की नजर उसकी तरफ पड़ती, वो झट से अपनी किताब में झाँकने लगता, मानो कुछ पढ़ रहा हो। दिल में एक डर सा रहता—कहीं अनिका को उसकी हरकत गलत न लगे। और अगर किसी टीचर ने देख लिया या बात गाँव तक पहुँच गई, तो पिटाई तो पक्की थी। गाँव में ऐसी बातें आसानी से माफ नहीं होती थीं।

राजू का दिल अनिका के लिए धड़कता था, लेकिन उसकी हिम्मत जवाब देती थी। वो सोचता, “अगर मैंने अनिका से अपने दिल की बात कह दी, और उसने टीचर को बता दिया? या फिर उसके भाई को पता चल गया?” अनिका का बड़ा भाई रवि गाँव में मशहूर था अपनी सख्ती के लिए। राजू को याद था कि पिछले साल जब एक लड़के ने अनिका की सहेली को चिट्ठी दी थी, तो रवि ने उसकी ऐसी पिटाई की थी कि वो हफ्ते भर स्कूल नहीं आया।


फिर भी, राजू का दिल बेकाबू था। वो अनिका की एक झलक पाने के लिए क्लास में सबसे आगे की बेंच पर बैठता, जहाँ से वो उसे आसानी से देख सके। अनिका हमेशा अपनी सहेलियों—निशा, प्रिया, और मधु के साथ रहती। वो चारों हर वक्त हँसती-खिलखिलाती, और उनके बीच की दोस्ती पूरे स्कूल में मशहूर थी। राजू को कभी मौका नहीं मिलता कि अनिका को अकेले में अपनी बात कह सके।

राजू का दोस्त संजय

राजू का एकमात्र दोस्त था संजय। संजय थोड़ा बिंदास था, हमेशा हँसता-मजाक करता। उसकी बातों में एक जादू था, जो किसी का भी मूड फट से ठीक कर दे। एक दिन स्कूल के बाद दोनों बरगद के पेड़ के नीचे बैठे थे। आसमान में सूरज ढल रहा था, और हवा में खेतों की मिट्टी की सौंधी सी खुशबू आ रही थी। राजू ने हिम्मत जुटाकर संजय से कहा, “संजय, मुझे अनिका से प्यार है। लेकिन मैं उससे कह नहीं पाता। डर लगता है कि कहीं बात बिगड़ न जाए।”

“भाई, तू ऐसे ही देखकर दिल बहला रहा है, कभी कुछ बोलेगा भी या नहीं?” संजय ने कहा।

राजू ने सिर झुकाकर जवाब दिया, “डर लगता है… कहीं सब कुछ बिगड़ न जाए।”

“कुछ कहे बिना ही सब बिगड़ जाएगा… कुछ करके तो देख।” संजय ने हौसला दिया।

संजय ने हँसते हुए राजू के कंधे पर धप्पा मारा और बोला, “अरे राजू, प्यार तो वही है जो डर को मात दे! तू टेंशन मत ले, मैं कुछ न कुछ जुगाड़ करता हूँ।” संजय की बातों से राजू को थोड़ी राहत मिली, लेकिन डर अभी भी उसके मन में घर किए था।

कुछ दिन ऐसे ही बीते। राजू की आँखें हर रोज़ अनिका को देखतीं, लेकिन जुबां कुछ नहीं कहती।

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संजय और निशा का प्यार

कुछ हफ्ते बाद स्कूल में एक नया प्यार का रंग चढ़ा। संजय को अनिका की सहेली निशा पसंद आ गई थी। निशा का चुलबुला अंदाज और उसकी हँसी संजय को भा गई थी। एक दिन संजय ने हिम्मत करके निशा के लिए एक चिट्ठी लिखी। उसने चिट्ठी में अपनी बात सादगी से रखी—कि वो उसे पसंद करता है और उससे दोस्ती करना चाहता है। उसने चिट्ठी चुपके से निशा की किताब में रख दी।


अगले दिन निशा ने चिट्ठी पढ़ी और मुस्कुराई। उसने भी जवाब में एक चिट्ठी लिखी और संजय को दी। इस तरह दोनों के बीच चिट्ठियों का सिलसिला शुरू हो गया। संजय हर दिन स्कूल के बाद राजू को अपनी और निशा की बातें बताता। राजू खुश था अपने दोस्त के लिए, लेकिन साथ ही उसके मन में एक उम्मीद जगी। उसने सोचा, “अगर संजय निशा से बात कर सकता है, तो शायद निशा के जरिए मैं अपनी बात अनिका तक पहुँचा सकता हूँ।”

एक दिन राजू ने संजय से कहा की यार संजय मुझे तुम से एक बात कहनी थी, संजय ने कहा है बोल क्या कहना चाहता है, तो राजू ने कहा की मेरा भी एक खत निशा के जरिये अनिका तक पंहुचा सकता है ?

तो संजय ने हँसते हुए कहा की “अगर दिल की बात है और साफ़ है, तो क्यों नहीं भाई ?” भाई के लिए कुछ भी करूँगा।

एक रात राजू अपने घर की छत पर बैठा था। आसमान में चाँद चमक रहा था, और उस रत हवा में ठंडक थी। उस रात राजू ने अपनी कॉपी के एक पन्ने पर पहली बार अपने जज़्बात लिखे। वो पन्ना सादा नहीं था, उसमें उसके दिल की धड़कनें बसी थीं।

“अनिका, मैं नहीं जानता कि ये बात कहना ठीक है या नहीं। लेकिन मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। तुम्हारी मुस्कान मेरे लिए दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज है। मैं तुम्हें हर दिन देखता हूँ, लेकिन हिम्मत नहीं होती कि तुमसे बात कर सकूँ। मैं बस इतना चाहता हूँ कि तुम मेरी बात समझो। मैं तुम्हारा बहुत सम्मान करता हूँ और कभी तुम्हें परेशान नहीं करना चाहता। —राजू”


लेटर लिखने के बाद राजू ने उसे कई बार पढ़ा। उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। अगले दिन उसने संजय को लेटर दिया और कहा, “संजय, इसे निशा को दे दे। और बोलना कि अनिका तक पहुँचा दे।” संजय ने मुस्कुराते हुए लेटर लिया और बोला, “बस, अब तू देख, तेरी लव स्टोरी शुरू होने वाली है!”

अगले दिन संजय ने वह खत निशा को दिया और उसे समझाया, “अगर अनिका को भरोसे से देना चाहे तो दे देना, वरना फाड़ देना।”

निशा मुस्कराई, “मैं देख लूंगी, लेकिन तुम्हारा दोस्त कुछ ज़्यादा ही सीरियस लगता है।”

अनिका का उलझा मन

निशा ने स्कूल में ब्रेक के वक्त अनिका को लेटर दिया। अनिका उस वक्त अपनी सहेलियों के साथ स्कूल के प्रांगण में बैठी थी। निशा ने चुपके से उसे लेटर थमाया और कहा, “अनिका, ये राजू ने तेरे लिए लिखा है। पढ़ ले, और प्लीज, किसी को मत बताना।”


अनिका ने लेटर लिया और उसे अपनी किताब में छुपा लिया। घर जाकर उसने चुपके से लेटर पढ़ा। राजू की सादगी और सच्चाई भरी बातों ने उसके दिल को छू लिया। लेकिन साथ ही उसे डर भी लगा। वो जानती थी कि गाँव में ऐसी बातें आसानी से स्वीकार नहीं होतीं। अगर उसके भाई रवि को पता चला, तो मुसीबत हो जाएगी। उसने निशा से कहा, “निशा, ये सब ठीक नहीं है। अगर किसी को पता चल गया, तो बहुत बवाल होगा।”


निशा ने उसे समझाया, “अनिका, राजू बहुत अच्छा लड़का है। वो तुझसे सच्चा प्यार करता है। तू कम से कम उसकी बात तो सुन।” अनिका ने कुछ सोचा और कहा, “मैं सोचूँगी। लेकिन अभी ये बात यहीं तक रहे।”

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सस्पेंस की हल्की-सी आहट

अगले कुछ दिन राजू के लिए बहुत लंबे थे। वो हर दिन अनिका को देखता, लेकिन उसकी नजरों में कुछ अलग सा था। अनिका कभी-कभी उसकी तरफ देखती, लेकिन फिर जल्दी से नजरें हटा लेती। राजू का मन उलझन में था। क्या अनिका ने लेटर पढ़ा? क्या वो नाराज है? क्या उसने किसी को बता दिया?


एक दिन संजय ने राजू को बताया, “निशा ने कहा कि अनिका ने लेटर पढ़ लिया है। वो कुछ सोच रही है, लेकिन उसने अभी कोई जवाब नहीं दिया।” राजू का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। उसने कहा, “संजय, अगर उसने अपने भाई को बता दिया तो? या टीचर को?” संजय ने हँसते हुए कहा, “अरे, तू इतना डरता क्यों है? अनिका ऐसी लड़की नहीं है। थोड़ा इंतजार कर भाई।” ऐसे ही लड्डू खायेगा और हंसने लगा।

विक्रम: एक अनजाना खतरा

लेकिन कहानी में एक नया किरदार तब आया, जब स्कूल के एक और लड़के, विक्रम, को इस बात की भनक लगी। विक्रम लंबा-चौड़ा था और गाँव में अपनी दबंगई के लिए जाना जाता था। वो भी अनिका को पसंद करता था, लेकिन उसका तरीका राजू से बिल्कुल अलग था। वो अनिका को इंप्रेस करने के लिए कभी जोर-जोर से हँसता, तो कभी अपने दोस्तों के साथ शोर मचाता।


विक्रम ने एक दिन निशा और संजय को स्कूल के पीछे चुपके से बात करते देख लिया। उसे शक हुआ कि कुछ तो चल रहा है। उसने अपने दोस्त मनीष से कहा, “मुझे लगता है राजू और संजय कुछ गड़बड़ कर रहे हैं। और ये निशा भी इनके साथ मिली हुई है। मैं पता लगाऊँगा।”


विक्रम ने निशा को अकेले में पकड़ लिया और पूछा, “तू और संजय क्या चिट्ठी-विट्ठी खेल रहे हो? और ये राजू क्या अनिका के पीछे पड़ा है?” निशा घबरा गई, लेकिन उसने हिम्मत से कहा, “तुझे गलतफहमी हुई है, विक्रम। कुछ नहीं है ऐसा।” विक्रम ने धमकी दी, “ठीक है, लेकिन अगर मुझे कुछ पता चला, तो मैं टीचर को बता दूँगा।” निशा ने किसी तरह बात टाल दी, लेकिन वो डर गई थी। उसने संजय को ये बात बताई, और संजय ने राजू को।

अनिका का जवाब

उसी शाम अनिका ने निशा को एक चिट्ठी दी और कहा, “ये राजू के लिए है। लेकिन प्लीज, इसे चुपके से देना।” निशा ने चिट्ठी संजय को दी, और संजय ने उसे राजू तक पहुँचाया। राजू ने काँपते हाथों से चिट्ठी खोली। उसमें लिखा था:


“राजू, तुम्हारा लेटर मैंने पढ़ा। तुम्हारी बातें मुझे अच्छी लगीं, लेकिन मैं बहुत उलझन में हूँ। गाँव में ऐसी बातें आसान नहीं हैं। मैं तुमसे बात करना चाहती हूँ, लेकिन डर भी लगता है। अगर तुम चाहो, तो कल स्कूल के बाद बरगद के पेड़ के पास मिल सकते हैं। लेकिन ये बात किसी को नहीं पता चलनी चाहिए। —अनिका”


राजू का दिल खुशी से उछल पड़ा। वो पहली बार अनिका से बात करने जा रहा था। उस रात वो सो नहीं पाया। वो बार-बार अनिका की चिट्ठी पढ़ता और सोचता कि वो उससे क्या-क्या कहेगा।

मुलाकात और सस्पेंस

अगले दिन स्कूल खत्म होने के बाद राजू बरगद के पेड़ के पास पहुँचा। सूरज ढल रहा था, और आसमान में नारंगी रंग की छटा बिखरी थी। राजू का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। वो पेड़ के नीचे खड़ा अनिका का इंतजार करने लगा। कुछ देर बाद अनिका वहाँ आई। उसने नीली सलवार-कमीज पहनी थी, और उसके चेहरे पर डर के साथ-साथ एक हल्की-सी मुस्कान थी।


राजू ने हिम्मत जुटाकर कहा, “अनिका, मैंने जो लेटर में लिखा, वो सब सच है। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। मैं बस चाहता हूँ कि तुम मेरी बात समझो।” अनिका ने उसकी तरफ देखा और धीरे से कहा, “राजू, मैं तुम्हारी बात समझती हूँ। लेकिन मुझे डर लगता है। अगर मेरे भाई को पता चल गया, तो…” उसकी बात पूरी नहीं हुई कि अचानक झाड़ियों में से कुछ आवाज आई।


दोनों घबरा गए। तभी विक्रम और उसके दो दोस्त वहाँ से निकले। विक्रम ने तंज कसते हुए कहा, “अरे वाह, राजू! तू तो अनिका से चुपके-चुपके मिलने चला आया? अब देख, ये बात पूरे गाँव में फैलेगी।” अनिका का चेहरा डर से सफेद पड़ गया। राजू ने गुस्से में विक्रम की तरफ कदम बढ़ाया, लेकिन अनिका ने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा, “राजू, प्लीज, हमें यहाँ से जाना होगा।”


दोनों वहाँ से भागे, लेकिन विक्रम ने जोर से चिल्लाया, “तुम दोनों कहीं नहीं जा सकते! मैं अनिका के भाई को सब बता दूँगा!” उसकी आवाज हवा में गूँजती रही, और राजू और अनिका जंगल की तरफ भागे। लेकिन क्या वो विक्रम से बच पाएँगे? क्या अनिका का भाई रवि इस बात को जान जाएगा? और क्या राजू और अनिका का प्यार इस तूफान को झेल पाएगा? पढ़े अगले भाग में।

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नमस्ते, मैं तनीषा एक डिजिटल क्रिएटर जो जिंदगी को बिना किसी फिल्टर (Unfiltered) के जीने में यकीन रखती हूँ। खूबसूरती हो या करियर, रिश्ते हों या पैसा मैं हर चीज़ में परफेक्शन तलाशती हूँ। 'Dilsetanisha' के ज़रिये मैं आपके साथ शेयर कर रही हूँ अपने स्टाइल सीक्रेट्स, रिलेशनशिप एडवाइस और सफल होने के राज़।
2 Comments
  • लघु उपन्यास शैली मे कहानी अत्यंत रोचक लगी, आशा है आगे का भाग शीघ्र पढ़ने को मिलेगा 💕💕

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