Love Story: ये कहानी उत्तर प्रदेश के एक गांव की है, शाम का समय था। हल्की-हल्की हवा बह रही थी और नीम के पेड़ की परछाई ज़मीन पर चारो तरफ फैली हुई थी। उस नीम के छाव में एक बहुत ही खूबसूरत घर था, घर में रहने वाली रीना अपने 36 साल की उम्र में भी बेहद ख़ूबसूरत और सलीकेदार दिखती थी। उसका पति शहर में काम करता था, बस महीने में बस कुछ दिन ही घर आता था। बाद बाक़ी समय रीना अकेली अपने ससुरालवालों के बीच, चुपचाप अपने दिन काटती।
घर के ज्यादतर लोग उसे जिम्मेदार और शांत स्वभाव वाली बहू मानते थे, लेकिन सच में अंदर से देखा जाय तो रीना का मन खालीपन से भरा था। वो पति से दूर रहकर अकेली बोर हो गई थी।
इस गर्मी के छुट्टियों में उसका देवर का बेटा आदित्य (22 साल) पढ़ाई पूरी करने के बाद रहने आया, गांव घूमने के लिए। आदित्य लंबा-सा, दुबला-पतला, लेकिन आँखों में चमक लिए हुए स्मार्ट नौजवान था। वैसे उसका मन गाँव में कम ही लगता, लेकिन इस बार वो मन बना के आया था की इस बार गांव को बढ़िया से एक्सप्लोर करेगा।
पहली नज़दीकियाँ
एक दिन शाम को रीना आँगन में तुलसी को पानी दे रही थी। आदित्य वहीं खड़ा होकर उससे इधर- उधर की बाते करने लगा,
“चाची, आप हमेशा अकेली ही इतना काम कर लेती हैं, थकती नहीं हो आप ?
रीना मुस्कुरा दी, “और कौन है यहाँ काम करने वाला? अब तो बस आदत हो गई है इन सब का। ऐसे ही काफी देर तक वे दोनों एक दूसरे से बाते करते है। इस बातचीत के दौरान रीना बीच-बीच में मुस्करा भी रही थी, जोकि आदित्य को काफी अच्छा लग रहा था। और वो अपनी चाची के मुस्कान पर आकर्षित होने लगा।
उसकी मुस्कान आदित्य को अंदर तक छू गई। वह सोचने लगा कि उसकी चाची सिर्फ़ ज़िम्मेदार बहू ही नहीं, बल्कि दिल से कितनी नरम और अकेली भी है। चाची का अकेलापन देख आदित्य को थोड़ा मायूसी भी हुई। लेकिन फिलाहल वो चुप रहा।
इस तरह धीरे-धीरे आदित्य ने रीना के छोटे-छोटे कामों में मदद करनी शुरू की। जैसे कभी सब्ज़ी लाने चला जाता, कभी पानी भर देता, कभी बरामदे में बैठकर घंटो बातें करता। रीना को भी अच्छा लगने लगा कि कोई तो है जो उसकी बात ध्यान से सुनता है। और उसे महसूस करता है।
अनकहे जज़्बात
ऐसे ही दिन बीतते गए। आदित्य पढ़ाई के बहाने चाची के पास बैठ जाता और घंटों बात करता। उनके बीच उम्र का फ़ासला होते हुए भी सोच और अकेलेपन का दर्द उन्हें और करीब ला रहा था।
ऐसे ही एक रात की बात है अचानक रात को लाइट चली गई। पुरे घर में घुप्प अँधेरा था। रीना आँगन में दीया जलाने आई तो आदित्य भी वहीं था। अचानक अंधेर में वो आदित्य से टकरा गई, और डर के मारे आदित्य से चिपक गई। उसके ऐसा करते ही दोनों के मन में एक सिहरन दौड़ गई। रीना झेंप गई और आदित्य भी। लेकिन दोनों में से किसी ने कुछ नहीं बोला।
उस रात दोनों बिना कुछ कहे अपने-अपने कमरे में चले गए, लेकिन सच ये है की नींद किसी को नहीं आ रही थी। दोनों विस्तार पर करवटे ले रहे थे, और मन में एक अंजाना सा तूफान चल रहा था।
रिश्ता गहराता गया
धीरे-धीरे उनका रिश्ता अनकहे शब्दों से आगे बढ़ने लगा। सुबह की चाय साथ पीना, आँगन में देर तक बातें करना, कभी बरसात में भीगते हुए हँसना… हर पल उन्हें और करीब खींच रहा था। हालाँकि दोनों को पता था की वे दोनों एक दूसरे के तरफ आकर्षित हो रहे है और वे ये भी जानते थे की ये गलत है, लेकिन दिल के आगे मजबूर थे।
आदित्य कभी-कभी मज़ाक में कह देता, “चाची, अगर आप मेरी उम्र की होतीं तो मैं आपको शादी के लिए ज़रूर कह देता।”
रीना उसे डाँटने का नाटक करती, “पागल हो गए हो? ऐसी बातें मत किया करो।” गलत बात है ये।
लेकिन भीतर से उसका दिल भी धड़क उठता। क्योंकि कहीं न कहीं वह भी यही चाहती थी कि कोई उसे सच्चे दिल से चाहे। उसे प्यार करे उसका ख्याल रखे उसकी बाते सुने।
सच सामने आया
मगर ये मोहब्बत हमेशा छुपी नहीं रह सकी। घरवालों ने देख लिया था कि आदित्य अक्सर रीना के कमरे रात के अँधेरे में जाता है, या बरामदे में देर तक बैठा रहता है। धीरे-धीरे बातें पूरे घर में फैलने लगी।
एक दिन रीना की सास ने सबके सामने कहा –
“ये क्या हो रहा है रीना? तुम भतीजे के साथ इस तरह घुल-मिल क्यों रही हो? लोगों में बदनामी होगी।” थोड़ा सा भी इज्जत का ख्याल नहीं है तुम्हे, मैं साफ-साफ ये कह देना चाहती हु की ये सब तुरंत बंद हो जाना चाहिए नहीं तो मुझ से बुरा कोई नहीं होगा।
रीना शर्म से चुप रही। आदित्य ने हिम्मत दिखाई –
“दादी, इसमें गलत क्या है? मैं चाची का ख्याल रखता हूँ, तो इसमें ग़लत कौन-सी बात है?”
फिर दादी ने गुस्से में पलटते हुए उसे जवाब दिया।
“तुम्हें शर्म नहीं आती? ये तुम्हारी चाची है, माँ जैसी है। और तुम… तुम तो सारी इज़्ज़त मिट्टी में मिला दोगे।” आज के बाद इससे अकेले में कभी नहीं मिलना नहीं तो मैं तुम्हारा बाल नोच दूंगी।
जब परिवार के सामने खुला राज, तो सब चौंक गए।
उस दिन के बाद दोनों पर पहरा लगा दिया गया। रीना को आँगन से बाहर निकलने तक मना कर दिया गया, और आदित्य को शहर वापस भेजने की तैयारी होने लगी। क्योकि परिवार के लोग नहीं चाहते थे की मामला इससे ज्यादा आगे बढे।
रीना रो-रोकर थक गई। उसे लगा की जैसे उसका आख़िरी सहारा भी छिन जाएगा। आदित्य बेचैन हो उठा। लेकिन वह अब चुप नहीं रह सकता था।
एक रात उसने रीना से कहा,
“चाची, मैं अब सब सह नहीं सकता। हम चाहे रिश्तों के नाम से बँधे हों, पर मेरा दिल सिर्फ़ आपको चाहता है। अगर आपके बिना जीना पाप है, तो मैं ये पाप करने को तैयार हूँ।”
रीना की आँखों से आँसू बह निकले। उसने धीमे स्वर में कहा,
“आदित्य… तुम समझते हो ये रास्ता आसान है? समाज, रिश्तेदार, सब हमें मिटा देंगे।” कोई नहीं एक्सेप्ट नहीं करेगा हमें, जिंदगी और ज्यादा तबाह हो जाएगी। ये सब इतना आसान नहीं है जितना तुम सोच रहे हो। लोग दुनिया हमें मिटा देंगे।
“तो मिटा दें!” आदित्य ने उसका हाथ थाम लिया। “कम से कम हम साथ तो होंगे।” आदित्य काफी गुस्से में था।
दोनों ने लिया भागने का फैसला।
उस रात दोनों ने तय कर लिया कि वो अब इस बंधन से भाग निकलेंगे। अगली सुबह भोर होते ही आदित्य बाइक लेकर घर के पीछे वाले दरवाज़े से आया। जहाँ रीना छोटी-सी पोटली में कपड़े और गहने लेकर तैयार खड़ी थी।
दोनों ने पीछे मुड़कर एक बार को घर को देखा। वहाँ सिर्फ़ बंधन, ताने और अकेलापन था। आगे एक अज्ञात रास्ता, मगर उसमें दोनों का साथ था।
आदित्य ने बाइक को स्टार्ट किया और रीना कसकर आदित्य से लिपट गई। हवा उनके चेहरे पर थी, और पीछे छूटते गांव, घर सब धीरे-धीरे धुंधले पड़ने लगे।
अधूरी लेकिन सच्ची मोहब्बत
अब दोनों के आगे का रास्ता लंबा था, मंज़िल अनजानी थी, लेकिन दोनों के दिल में एक सुकून था—
अब कोई रिश्ता उन्हें बाँध नहीं रहा था।
रीना के आँसू आदित्य की पीठ पर गिरते रहे, और आदित्य ने उसकी पकड़ और मज़बूत कर ली।
उन्हें पता था कि आगे समाज से लड़ाई आसान नहीं होगी। बदनामी, तिरस्कार और संघर्ष उनका इंतज़ार कर रहा था। लेकिन उस पल दोनों के लिए सिर्फ़ इतना मायने रखता था कि वो एक-दूसरे के साथ हैं।
कभी-कभी प्यार खून के रिश्तों से भी बड़ा हो जाता है… और रीना-आदित्य की कहानी उसी का सबूत थी।
आपको ये कहानी कैसी लगी जरूर बताते।
❤❤