दिल्ली का वह अधूरा वादा: उम्मीद, इंतज़ार और सच्चाई। Hindi Love Story.

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Hindi Love Story: झारखंड एक छोटे से गाँव में, 19 साल की सुमन की दुनिया घर के चूल्हे और दूसरों के चौकों के बीच सिमटी हुई थी। लेकिन गरीबी उसके खूबसूरती को ढंक नहीं पाई थी—धूप में तपी सांवली त्वचा और बड़ी-बड़ी हिरनी जैसी आँखें, जिनमें थकान के पीछे सपने छिपे थे। पिता और भाई की मजदूरी से घर का आधा पेट भरता था, बाकी कसर सुमन और उसकी माँ दूसरों के घरों में काम करके पूरी करती थीं।

वक्त का पहिया तब घूमा जब सुमन की माँ अचानक बीमार पड़ गईं। घर का राशन और माँ की दवा का खर्च चलाने के लिए सुमन को अब अकेले ही काम पर जाना पड़ता था। जिस बड़े घर में वह काम करती थी, वहां शहर से आया हुआ एक लड़का ‘रोहन’ रहता था। रोहन दिल्ली में नौकरी करता था और छुट्टियों में घर आया हुआ था।

पहली शुरआत

शुरुआत में तो सब कुछ सामान्य था। सुमन अपना काम करती और चली जाती। लेकिन धीरे-धीरे रोहन ने उससे बातें करना शुरू किया। कभी पानी मांगता, कभी नाश्ता। सुमन को, जिसे जीवन में कभी किसी ने इतना महत्व नहीं दिया था, रोहन की बातें उसे अच्छी लगने लगीं। उन चंद पलों की बातचीत में सुमन को अपनी गरीबी और लाचारी धुंधली नजर आती। एक अनजाना सा खिंचाव दोनों के बीच पनपने लगा था।

उसके जीवन में पहला बदलाव तब आया जब एक दिन भरी दोपहर में सुमन आंगन में कपड़े धो रही थी। पसीने से उसकी लटें माथे पर चिपकी हुई थीं। अचानक उसे अपने पास किसी के आने की आहट महसूस हुई। उसने सिर उठाकर देखा तो रोहन खड़ा था, हाथ में ठंडे पानी का गिलास लिए हुए।

” आज बहुत गर्मी है सुमन, यह पी लो,” रोहन की आवाज में एक ऐसी नरमी थी जो सुमन ने अपने पिता या भाई की आवाज में कभी नहीं सुनी थी। उसने झिझकते हुए गिलास लिया। उनकी उंगलियां टकराई, और एक अजीब सी सिहरन सुमन के बदन में दौड़ गई। उसने जल्दी से पानी पिया और फिर काम में लग गई, लेकिन उस दिन उसका दिल जोर-जोर से धड़कता रहा।

धीरे-धीरे, यह सिलसिला बढ़ने लगा। जब घर में कोई नहीं होता, रोहन जानबूझकर उसे ऐसे काम बताता जहाँ वे आमने-सामने हों। कभी वह उसके काम की तारीफ करता, “तुम बहुत मेहनत करती हो सुमन, तुम्हारे हाथ का बना खाना माँ के हाथ से भी बेहतर है।” ये छोटे-छोटे बात सुमन के सूने जीवन में रंग भरने लगे। उसे लगने लगा कि कोई तो है जो उसे सिर्फ एक कामवाली नहीं, बल्कि एक इंसान समझता है।

एक शाम की बात है, बिजली चली गई थी। सुमन मोमबत्ती जलाकर किचन साफ़ कर रही थी। रोहन वहां आया। मोमबत्ती की मद्धम रोशनी में उन दोनों की परछाइयां दीवार पर एक हो रही थीं। रोहन ने धीरे से उसका हाथ अपने हाथ में लिया। सुमन काँप गई, लेकिन उसने हाथ नहीं खींचा।

“तुम्हारी ये आँखें…,” रोहन ने फुसफुसाते हुए कहा, “इनमें यहाँ का दुख नहीं, दिल्ली की चमक होनी चाहिए।”

उस पल सुमन को लगा कि वह दुनिया की सबसे खास लड़की है। रोहन का स्पर्श, उसकी बातें—यह सब उसके लिए एक नशे जैसा था। वह भूल गई कि वह कौन है और रोहन कौन। एक अनजाना, मीठा सा दर्द उसके सीने में उठने लगा। उसे रोहन से प्यार हो गया था।

जीवन का निर्णायक मोड़

इसी विश्वास और नए-नए पनपे प्यार के बीच वह दिन आया। घर खाली था। सुमन जब रोहन के कमरे में सफाई करने पहुंची, तो टीवी चल रहा था। स्क्रीन पर जो दृश्य थे, वे किसी भी गाँव की लड़की के लिए शर्मनाक थे। सुमन का पहला कदम पीछे हटने का था।

लेकिन तभी रोहन ने उसे देखा। उसकी आँखों में एक अलग ही नशा था। उसने उठकर सुमन का हाथ पकड़ा। उसकी पकड़ में वह पुरानी नरमी नहीं थी, बल्कि एक अधिकार और जिद थी।

“डरो मत सुमन,” उसने उसे अपने करीब खींचते हुए कहा, “जो हम महसूस करते हैं, यह उसी का हिस्सा है। मेरे पास बैठो।”

सुमन के दिमाग में नैतिकता की घंटियाँ बज रही थीं, लेकिन दिल रोहन के प्यार में गिरफ्तार था। जिन हाथों ने उसे पानी पिलाया था, जिन आँखों ने उसकी तारीफ की थी, उन पर वह अविश्वास कैसे करती? पहले जो अजीब लगा, वह रोहन के स्पर्श और माहौल की गर्मी में पिघलने लगा। उसे पता ही नहीं चला कि कब प्यार की वे कोमल बातें जिस्म की जरूरतों में बदल गईं। उस दिन उसने खुद को पूरी तरह रोहन को सौंप दिया।

मन में द्वन्द

अब रोहन दिल्ली वापस जाने वाला है। उसने सुमन के सामने एक नई दुनिया का दरवाजा खोल दिया है। “मेरे साथ चलो सुमन, हम शादी कर लेंगे। मैं तुम्हें इस गरीबी से निकाल ले जाऊँगा,” उसने सुमन से वादा किया है।

सुमन आज रात अपनी झोपड़ी के अंधेरे में जाग रही है। उसे रोहन का वह पानी का गिलास देना याद आता है, मोमबत्ती की रोशनी में उसका हाथ पकड़ना याद आता है, और फिर उस दिन कमरे में जो हुआ, वह भी याद आता है।

उसका मन कहता है कि रोहन का प्यार सच्चा है, तभी तो उसने उसे इतना सम्मान दिया (जो उसे लगा)। लेकिन उसका दिमाग डर रहा है। क्या वह सच में दिल्ली जाकर उससे शादी करेगा? बीमार माँ और बूढ़े बाप को छोड़कर वह कैसे भाग जाए?

प्यार का वह रोमांटिक नशा और हकीकत की कठोर जमीन—सुमन इन दोनों के बीच झूल रही है। 19 साल की उम्र में उसे अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा जुआ खेलना है, और उसे नहीं पता कि वह जीत की तरफ बढ़ रही है या बर्बादी की तरफ।

(कहनी अगले पार्ट में बाकि है)

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नमस्ते, मैं तनीषा एक डिजिटल क्रिएटर जो जिंदगी को बिना किसी फिल्टर (Unfiltered) के जीने में यकीन रखती हूँ। खूबसूरती हो या करियर, रिश्ते हों या पैसा मैं हर चीज़ में परफेक्शन तलाशती हूँ। 'Dilsetanisha' के ज़रिये मैं आपके साथ शेयर कर रही हूँ अपने स्टाइल सीक्रेट्स, रिलेशनशिप एडवाइस और सफल होने के राज़।
4 Comments
  • यह एक ऐसी स्थिति जहां कहानी कोई भी मोड ले सकती…क्या रोहन को अपना वादा याद रहा या दिल्ली की रंगीनियों में कही गुम गया।
    अब सुमन का क्या होगा वो रोहन का इंतजार करेगी या किसी के हाथ पकड़ लेगी…
    एक बेहतरीन शुरुआत…

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