Meerut Spa Raid: मेरठ में 13 जनवरी को पुलिस ने एक बड़ी छापेमारी की, जिसमें स्पा सेंटर्स की आड़ में चल रहे अवैध धंधे का पर्दाफाश हुआ। ये स्पा सेंटर्स बाहर से तो मसाज और ब्यूटी ट्रीटमेंट के नाम पर चल रहे थे, लेकिन अंदर से यहां जिस्मफरोशी का कारोबार हो रहा था। पुलिस की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) ने चार स्पा सेंटर्स पर एक साथ रेड मारी और कुल 21 लोगों को हिरासत में लिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें महिलाएं अपना चेहरा छिपाती नजर आ रही हैं। आइए जानते हैं इस पूरी घटना के बारे में विस्तार से।
घटना का पूरा विवरण
ये छापेमारी मेरठ के पॉश इलाकों में हुई, जहां स्पा सेंटर्स शहर के बड़े मॉल्स और व्यस्त सड़कों पर स्थित थे। पुलिस ने शॉप्रिक्स मॉल, मंगल पांडे नगर, गढ़ रोड, दिल्ली रोड और नंदिनी प्लाजा जैसे जगहों पर रेड डाली। जिन स्पा सेंटर्स पर कार्रवाई हुई, उनमें मेरठ स्किन सॉल्यूशन, ए वन फैब स्टूडियो, रोज वाटर विला और युवा फैमिली सैलून जैसे नाम शामिल हैं।
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि इन सेंटर्स में मसाज के नाम पर अवैध गतिविधियां चल रही हैं। इसके बाद AHTU और लोकल पुलिस की टीमों ने जाल बिछाया और एक साथ हमला किया। रेड के दौरान साइट पर कई ग्राहक और महिलाएं मौजूद थीं। पुलिस ने बताया कि ये सेंटर्स दिन में सामान्य स्पा की तरह काम करते थे, लेकिन शाम होते ही यहां का रंग बदल जाता था।
गिरफ्तारियां और जांच की स्थिति
इस ऑपरेशन में पुलिस ने कुल 20 युवतियों को हिरासत में लिया, जो यहां काम कर रही थीं। इनमें से 4 महिलाएं स्पा सेंटर्स की मैनेजर या संचालिकाएं थीं, जो पूरा मैनेजमेंट संभालती थीं। साथ ही एक युवक को भी पकड़ा गया, जो संभवतः ग्राहक था।
सभी को एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के ऑफिस में ले जाकर पूछताछ की जा रही है। जांच में पता चला कि ये महिलाएं अलग-अलग वजहों से इस काम में शामिल थीं। कुछ ने इसे मजबूरी बताया, जैसे आर्थिक तंगी या घर की जिम्मेदारियां, जबकि कुछ ने इसे टाइम पास या आसान कमाई का तरीका कहा। पुलिस ने कई मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड्स, आपत्तिजनक तस्वीरें और ग्राहकों के नामों वाला रजिस्टर बरामद किया है। ये सबूत अब जांच का हिस्सा हैं।
वीडियो में क्या दिखा और महिलाओं की प्रतिक्रिया
छापेमारी के बाद एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे एक्स (ट्विटर) पर फैल गया। इस वीडियो में पकड़ी गई महिलाएं अपना मुंह छिपाती नजर आ रही हैं। कैमरे के सामने वे शर्मिंदगी महसूस कर रही थीं और चेहरा ढकने की कोशिश कर रही थीं।
पूछताछ के दौरान कुछ महिलाओं ने बताया कि वे मजबूरी में इस काम में आईं, क्योंकि नौकरी या पैसे की कमी थी। वहीं कुछ ने कहा कि ये उनके लिए सिर्फ टाइम पास था या अतिरिक्त कमाई का साधन। ये बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गए हैं, जहां लोग ह्यूमन ट्रैफिकिंग और महिलाओं की सुरक्षा पर बात कर रहे हैं।

ऑपरेशन का तरीका: व्हाट्सएप पर होती थी पूरी डील
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि ये पूरा रैकेट डिजिटल तरीके से चलता था। ग्राहकों से बुकिंग व्हाट्सएप पर होती थी। पहले महिलाओं की तस्वीरें और प्रोफाइल शेयर की जातीं, फिर डील फाइनल होने पर उन्हें स्पा सेंटर पर बुलाया जाता। ये तरीका बहुत चालाकी से अपनाया जाता था, ताकि बाहर से सब कुछ सामान्य लगे।
ऐसे रैकेट्स में अक्सर ह्यूमन ट्रैफिकिंग का एंगल भी होता है, जहां महिलाओं को झांसा देकर या मजबूर करके शामिल किया जाता है। पुलिस अब ये जांच रही है कि क्या यहां कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था या ये लोकल लेवल का मामला है।
पुलिस की आगे की कार्रवाई
पुलिस का कहना है कि ये कोई पहला मामला नहीं है। मेरठ में पहले भी कई स्पा और सैलून रैकेट पकड़े जा चुके हैं। इस बार इमोरल ट्रैफिक (प्रिवेंशन) एक्ट और ह्यूमन ट्रैफिकिंग से जुड़ी धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। संचालकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, और अगर ट्रैफिकिंग का लिंक मिला तो और बड़े खुलासे हो सकते हैं।





