Love Crime Story: दिसंबर महीने के धुंध भरी ठण्ड का मौसम था। रवि, एक 23 साल का नौजवान, जो की अपनी नई-नवेली पत्नी माया के साथ, ताजमहल घूमने के लिए निकला था। उसकी आँखों में प्यार की चमक थी, और दिल में अपनी खूबसूरत दुल्हन के साथ नई यादें बनाने की चाह में काफी खुश था। माया, 20 साल की, गोरी-चिट्टी औरत थी, जिसकी मुस्कान में मासूमियत और आँखों में एक अनकही तड़प थी, रवि के साथ गाड़ी में बैठी थी। उसकी साड़ी का पल्लू हवा में लहरा रहा था, और उसकी नजरें बार-बार खिड़की से बाहर की ओर टिक रही थीं, जैसे मानो वो किसी और का इन्तजार कर रही थी।
तुम सिर्फ मेरी हो।
लेकिन माया का दिल कहीं और था। उसका चचेरा भाई विक्रम, जिसके साथ उसकी जवानी की शुरुआत से ही एक गहरा, निषिद्ध रिश्ता था, वो उसकी हर सांसों में बस्ता था। दोनों के बीच का ये प्यार और आकर्षण बचपन से था, जब वे गांव के खेतों (गन्ने) में चांदनी रातों में, एक-दूसरे की बाहों में खो जाया करते थे। उनकी नजरें एक-दूसरे को चुपके से ढूंढती थीं, और हर मुलाकात में एक ऐसी आग थी जो समाज की नजरों में गलत ही नहीं पाप। लेकिन क्या करे गांव के ज़्यदातर इश्क ऐसे ही होता है, हर कोई किसी ना किसी रिश्ते कुछ होता ही है, ये रिश्ते जन्म से ही बन जाते है। कुछ लोग उसे लेकर जीवन भर ढोते है तो कुछ लड़के,लड़किया इस रिश्ते से आजाद होना चाहते है, कुछ ऐसी ही प्रेम कहानी थी रवि और माया की।
ऐसे ही इनका प्यार परवान चढ़ता गया, हालाँकि ऐसा नहीं है की गांव, मोहल्ले वाले को इनकी इस प्रेमकहानी का पता नहीं था, लगभग हर किसी को पता था, लेकिन कोई कुछ बोलता नहीं था, आखिर बोले भी तो क्या बोले ज्यादातर लोगो का यही हाल है।
इस बीच कई बार दोनों के परिवार वालो से इनकी शिकायत किया था, लेकिन घर वाले भी मजबूर थे, थक हार के माया के घर वालो ने उसकी शादी किसी और से तय कर दिया, जिसका नाम रवि था , लड़का ठीक ठाक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था और बढ़िया पैसा कमाता था, यही सब देखकर माया की शादी रवि से तय हो गई।
लेकिन जब माया की शादी रवि से तय हुई, तो विक्रम का खून खौल उठा। उसने माया से वादा किया कि वह उसे किसी और का नहीं होने देगा। चाहे उसके लिए उसे कुछ भी करना पड़े वो करेगा। और फिर उसके बाद तुम से ही शादी करूँगा, तुम सिर्फ मेरी हो किसी और के नहीं हो सकती, ये सारी बात विक्रम ने माया से कही।
प्यार के आगे जिंदगी कुर्बान
उस रात, जब रवि और माया आगरा के लिए निकले, विक्रम उनकी गाड़ी के पीछे ही था, बिलकुल किसी छाया की तरह। रास्ते में एक सुनसान जगह पर गाड़ी रुकी। माया ने रवि को अपनी मादक मुस्कान से लुभाना शुरू कर दिया , उसका हाथ पकड़ा, और उसे अपने पास खींचा। रवि, उसकी खूबसूरती में खोया, उसकी बातों में उलझ गया। माया की नरम आवाज और उसकी साड़ी से झांकती कमर की एक झलक ने रवि को एकदम बेसुध कर दिया। लेकिन यह सब एक जाल था।
पीछे से विक्रम ने मौका देखकर वार किया, जोकि वो बहुत पहले से किसी छाया की तरह रवि का पीछा कर रहा था। एक पल में रवि की सांसे थम गईं। रवि को तड़पता देख माया की आँखों में पछतावा नहीं, बल्कि एक अजीब-सी राहत थी, वो रवि को मरता देख काफी खुश थी। फिर दोनों ने मिलकर रवि के शव को सड़क किनारे झाड़ियों में छिपा दिया, शायद यह सोचकर कि उनकी गुनाह की कहानी रात की धुंध में गुम हो जाएगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं, जैसा वो सोच रहे थे।
अगले दिन, जब रवि का लाश मिला तो उसके भाई अजय ने उसे तुरंत पहचाना लिया। और अजय ने तुरंत माया और विक्रम पर शक जताया। ऐसा इसलिए की वो अपनी भाई के पत्नी के बारे में सच्चाई जनता था, और इसके पीछे कई बार घर में लड़ाई- झगडे भी हुए थे, पुलिस ने जब छानबीन शुरू की, तब जाकर धीरे-धीरे सारा राज खुल गया—माया और विक्रम का गुप्त रिश्ता, उनकी साजिश, और वह खौफनाक रात। सब कुछ परत दर खुलने लगा।
पुलिस ने विक्रम और माया को गिरफ्तार कर उन्हें जेल भेज दिया।
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